इरोम चानू शर्मिला आयरन लेडी ऑफ इंडिया


“सबसे लम्बी भूक हड़ताल” करनेवाली “इरोम शर्मीला”
जन्म-14 मार्च 1972
कोंगपालइम्फालमणिपुरभारत

राष्ट्रीयता-भारतीय

व्यवसाय-मानवाधिकार कार्यकर्ता, कवयित्री

प्रसिद्धि कारण-सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम,

१९५८ को हटाने के लिए भूख हड़ताल

माता-पिता
इरोम नंदा (पिता)
इरोम ओंग्बी सखी (माता)

  इरोम ने अपनी भूख हड़ताल तब की थी जब 2 नवम्बर के दिन मणिपुर की राजधानी इंफाल के मालोम में असम राइफल्स के जवानों के हाथों 10 बेगुनाह लोग मारे गए थे। उन्होंने 4 नवम्बर 2000 को अपना अनशन शुरू किया था, इस उम्मीद के साथ कि 1958 से अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, असम, नगालैंड, मिजोरम और त्रिपुरा में और 1990 से जम्मू-कश्मीर में लागू आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (एएफएसपीए) को हटवाने में वह महात्मा गांधी के नक्शेकदम पर चल कर कामयाब होंगी।


पूर्वोत्तर राज्यों के विभिन्न हिस्सों में लागू इस कानून के तहत सुरक्षा बलों को किसी को भी देखते ही गोली मारने या बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार है। शर्मिला इसके खिलाफ इम्फाल के जस्ट पीस फाउंडेशन नामक गैर सरकारी संगठन से जुड़कर भूख हड़ताल करती रहीं। सरकार ने शर्मिला को आत्महत्या के प्रयास में गिरफ्तार कर लिया था। क्योंकि यह गिरफ्तारी एक साल से अधिक नहीं हो सकती अतः हर साल उन्हें रिहा करते ही दोबारा गिरफ्तार कर लिया जाता था।

 नाक से लगी एक नली के जरिए उन्हें खाना दिया जाता था तथा इस के लिए पोरोपट के सरकारी अस्पताल के एक कमरे को अस्थायी जेल बना दिया गया था।

उपवास का अंत:

26 जुलाई 2016 को इरोम शर्मीला ने घोषणा की के 9 अगस्त 2016 को वह अपना उपवास छोड़ेंगी। साथ ही उन्होंने मणिपुर राज्य चुनाव में खड़ा रहने की घोषणा भी की थी। अंततः 2000 से चले आ रहे उपवास का अंत 2016 में हुआ था।

{इरोम चानू द्वारा प्राप्त महत्वपूर्ण उपलब्धियां}
मानव अधिकार की सुरक्षा करने के उपलक्ष में 2007 में उन्हें ग्वांगजू प्राइज से सम्मानित किया गया।

✓ 2009 में उन्हें मयीलाम्मा संस्था का पहला मयीलाम्मा अवार्ड दिया गया, यह अवार्ड उन्हें मणिपुर में उनके द्वारा किये गए अहिंसावादी आंदोलन के लिए दिया गया था।

✓ 2010 में उन्हें एशियन ह्यूमन राइट्स कमीशन का लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। 

✓ उसी साल बाद में उन्होंने भारतीय योजना और निति आयोग का रबिन्द्रनाथ टैगोर शांति पुरस्कार भी जीता।

✓ 2013 में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी उन्हें राजनैतिक कैदी घोषित किया। 

✓ 2014 में इंटरनेशनल विमेंस डे पर MSN पोल में उन्हें टॉप वीमेन आइकॉन ऑफ़ इंडिया का शीर्षक दिया गया था।


इनके जीवन से हमें एक प्रेरणा दायक सीख मिलिती है कि हमें जीवन में कभी हार नहीं माननी चाइये। क्यों कि संघर्ष मनुष्य जीवन का हिस्सा है जिसे हमें मजबूरी नहीं बनाना चाईए ।


धैर्य, दृढ़ता, और पसीना सफलता के लिए एक अपराजेय मिश्रण हैं.

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