
जिले के रूप में गठन 1972 ई हुआ है।
क्षेत्रफल–1,549 किमी²
जनसंख्या(2011)- 5,21,057
घनत्व– 340/किमी²

[ ऊना जिला मुख्यत: जसवां रियासत और कुटलेहर रियासत के अन्तर्गत आता था]
जस्वां रियासत: ऊना जिले का अधिकतर भाग जसवां रियासत के अन्तर्गत आता था।
• जसवां रियासत की स्थापना कांगड़ा के कटोच वंश के राजा पूर्व चंद ने 1170 ई में की थी।
• जसवां रियासत कांगड़ा से टूटकर बनने वाली पहली रियासत थी।
• इस रियासत पर पूर्व चंद से लेकर उमेद सिंह तक 27 राजाओं ने शासन किया।
• संसार चंद के विरूद्ध उमेद चंद ने गौरखो का साथ दिया था।
[कुटलेहर रियासत भी ऊना जिले का हिस्सा थी जो कांगड़ा रियासत से टूटकर बनी थी]
• कुटलेहर रियासत कांगड़ा की सबसे छोटी रियासत थी।
• इस रियासत की स्थापना जसपाल नामक ब्राह्मण ने की।
• संसार चंद ने 1786 ई में कुटलेहैर पर कब्ज़ा किया जिसे बाद में गोरखाओं ने आजाद करवाया।
• वर्ष 1809 ई में राज्य सिक्खों के अधीन आ गया।
• बेदी विक्रम सिंह ने 1848 ई में अंग्रेज़ो के विरूद्ध विद्रोह किया।
• ऊना जिले से सर्वप्रथम 1905 ई में बाबा लछमन दास आर्य ने स्वाधीनता आंदोलन में प्रवेश किया।
• ऊना शहर कि नींव बाबा कलाधारी ने रखी थी।
{ वर्तमान ऊना जिला 1966 ई से पूर्व पंजाब के होशियार पुर जिले कि तहसील थी। वर्ष 1966 ई से 1972 ई तक अना कांगड़ा जिले का भाग था। वर्ष 1972 ई में ऊना को जिले का दर्जा प्रदान किया गया}
{मंदिर – मेले}


चिंतपूर्णी धाम हिमाचल प्रदेश मे स्थित है। यह स्थान हिंदुओं के प्रमुख धार्मिक स्थलो में से एक है। यह 51 शक्ति पीठो मे से एक है। यहां पर माता सती के चरण गिर थे। इस स्थान पर प्रकृति का सुंदर नजारा देखने को मिल जाता है। यात्रा मार्ग में काफी सारे मनमोहक दृश्य यात्रियो का मन मोह लेते हैं और उनपर एक अमिट छाप छोड़ देते हैं। यहां पर आकर माता के भक्तों को आध्यात्मिक आंनद की प्राप्ति होती है।

• यह स्थान ऊना के मेड़ी में स्थित है। यहां हर वर्ष मेले का आयोजन होता है जिसमें देश के अलग अलग राज्यो लोग भाग लेते है।
300 वर्ष पूर्व बाबा राम सिंह के सुपुत्र संत बाबा वड़भाग सिंह करतारपुर पंजाब से आकर यहां बसे थे। कहा जाता है कि अहमद शाह अब्दाली के तेहरवें हमले से क्षुब्ध् होकर बाबा जी को मजबूरन करतारपुर छोड़कर पहाड़ों की ओर आना पड़ा था। जब बाबा जी दर्शनी खड्ड के पास पहुंचे तो उन्होंने देखा कि अब्दाली की अफगान फौजें उनका पीछा करते हुए उनके काफी नजदीक आ गई हैं। इस पर बाबा जी ने आध्यात्मिक शक्ति से खड्ड में जबरदस्त बाढ़ ला दी और अफगान फौज के अध्कितर सिपाही इसमें बह गए और कुछ जो बचे वे हार मानकर वापिस लौट गए। उसके बाद बाबा जी एक स्थान पर तपस्या में लीन हो गए।

• प्रसिद्ध धार्मिक स्थल डेरा बाबा बड़भाग सिंह मैड़ी ऐतिहासिक होला मेला परंपरागत उल्लास के साथ मनाया जाता है।
• 3 मार्च से 12 मार्च तक लोग यहां पहुंच कर शीश नवाते है,मुरादें पूरी होती है ।
• चरण गंगा में हजारों लोग स्नान करते है।
{परीक्षाओं से संबधित ऊना जिले के कुछ महत्वूर्ण पहलू}
✓ ऊना तहसील को जिले का दर्जा यशवंत सिंह परमार जी ने दिया था।
✓ होशियार पुर की ऊना तहसील को हिमाचल में 1966 ई में मिलाया गया।
✓ ऊना जिले का सबसे बड़ा गांव देहला है।
✓ जसवान दुन्न ऊना जिले का पुराना नाम है।
✓ ठाकुर हजार सिंह ऊना जिले से संबधित है।
✓ ऊना नंगल रेलवे लाइन 1991 ई में बनाई गई। यह ब्रॉड गेज रेलवे लाइन है।












































