किन्नौर

पौराणिक किन्नौरों की भूमि किन्नौर हिमाचल प्रदेश के उत्तर पूर्व में स्थित एक जिला है। किन्नौर जिले का मुख्याल्य रिकांग पिओ है। ऊंचे-ऊंचे पहाडों और हरे-भरे पेडों से घिरा यह क्षेत्र ऊपरी, मध्य और निचले किन्नौर के भागों में बंटा हुआ है।

प्राकृतिक द्श्यावली से भरपूर इस ज़िले की सीमा तिब्बत से सटी हुई है, जो इसे सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती है।

पहाडों और जंगलों के बीच कलकल ध्वनि से बहती सतलुज और स्पीति नदियों का संगीत यहां की सुंदरता में चार चांद लगा देता है। स्पीति नदी आगे चलकर खाब में सतलुज से मिल जाती है। जिले के रूप में इसका गठन 21 अप्रैल , 1960

मुख्यालय-रिकांग पिओ
क्षेत्रफल-6,401 कि॰मी2 (2,471 वर्ग मील)
जनसंख्या-84298

तहसीलें
सांगला, पूह, निचर, मूरांग कल्पा

{इतिहास}

किन्नौर राज्य रामपुर बुशहर रियासत का एक अंग था। यहां पर बहुपति प्रथा पाई जाती है। यहां के प्रसिद्ध राजा थे—प्रतमपाल, चतरसिंह तथा केहरी सिंह, जिसे ‘अजान बाहु’ नाम से भी जाना जाता था।

  • किन्नौर की आदिम जाति की उत्पत्ति देविक लीला से हुई मानी जाति है।

• अमरकोश ग्रंथ में किन्नर जाति का वर्णन मिलता है।

• तीबती लोग किन्नौर को खुन्नू कहते है।

• पांडवो ने 12 वर्ष का वनवास किन्नोर में बिताया था।

• वायु पुराण में किन्नरों को महानंद पर्वत का निवासी बताया गया है।


{मध्यकालीन इतिहास}
बुशहर रियासत बिलासपुर और सिरमौर के साथ शिमला पहाड़ी राज्यो कि तीन प्रमुख शक्तियों में से एक थी।

• राजा चतर सिंह बुशहर का 110 वां शासक था। जिनका पुत्र केहरी सिंह रियासत का सबसे शक्तिशाली राजा था । जिसे आजानुबाहु भी कहा गया है।

• मुगल बादशाह ओरांगजेब ने केहरी सिंह को {छत्रपति} की उपाधि भी दी थी।


{आधुनिक इतिहास}
गोरखों ने 1803 से 1815 तक बुशहर रियासत पर आक्रमण कर सराहन पर कब्ज़ा के कर लिया।

• उस समय रियासत का शासक राजा महेंद्र सिंह था।
• वजीर टिक्का राम और बदरी प्रसाद ने गोरखों के विरूद्ध युद्ध का नेतृत्व किया।

सतलुज नदी पर बने वांगतू पुल को तोड़कर गोरखों को रोका गया।

• 1857 ई में बुशहर रियासत के राजा शमशेर सिंह ने अंग्रेज़ो कि सहायता नहीं की।

• 13 नवम्बर 1914 को बुशहर रियासत का अंतिम शासक राजा पद्मसिंह गद्दी का बैठा तथा उसने 1947 तक शासन किया।

{सन् 1948 में बुशहर राज्य केंद्र शासित चीफ कमीश्नर क्षेत्र हिमाचल प्रदेश का हिस्सा बना। 1960 तक वर्तमान किन्नौर जिला, महासू जिला की मिनी तहसील बना। 21 अपै्रल, 1960 को किन्नौर हिमाचल प्रदेश का छठा जिला बना।

{संस्कृति , त्योहार , रीति – रिवाज}

Kinnauri bride

{विवाह}

जनेटांग जो कि एक व्यवस्थित विवाह है।

दमचल शीश , दमत्तंग शीश , जुजिश जो एक प्रेम विवाह है।

दरोश , डब डब , हाचिश जबरन विवाह के प्रकार है।

{त्योहार}
✓ छतरैल- जो कि चैत्र माह में मनाया जाता है।

✓ दखेरनी- जो कि सावन के महीने में मनाया जाता है।

✓ उखयांग या फुलेच – जो कि फूलों का त्योहार है और अगस्त में मनाया जाता है।

✓ तोशिम- यह अविवाहित पुरुषों द्वारा तथा इसमें [घांती] शराब का सेवन किया जाता है।


{पोशाक}
छमु कुर्ती पुरषों द्वारा पहनी जाने वाली कमीज़ है। छमू सुथन ऊनी पजामा है
महिलाएं डोरी , चोली और गचांग पहनती है
थेपांग हिमाचली टोपी का नाम है


{किन्नौर से सम्बन्धित कुछ महत्वपूर्ण पहलू}

लवी मेला बुशहर के राजा केहरि सिंह ने 1683 ई में शुरू किया था।

✓ किन्नौर के कड़चम में भेड़ प्रजनन केंद्र है।

कल्पा रिकांगपिओ से पहले किन्नौर का मुख्यालय था।

✓ छितकुल बस्पा घाटी का अंतिम गांव है।

चीनी कल्पा का पुराना नाम है।

✓ लद्दाख को किन्नौर में मोने नाम से पुकारते है।

✓ अंगुरो की भूमि रिब्बा हिमाचल किन्नौर में स्थित है।

{ जल विद्युत परियोजना}

• संजय जल विद्युत परियोजना (भाभा) – 120 mw

• नाथपा झाकड़ी – 1500mw

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